परीक्षा समाप्त, बच्चों में खुशी की लहर

हमारा उद्देश्य है कि हर बच्चा पढ़ने, लिखने और गणना करने में दक्ष बने – राजेश वशिष्ठ

परीक्षा समाप्त, बच्चों में खुशी की लहर


जींद - जिले में बलवाटिका-3 से लेकर पाँचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षाएँ समाप्त होते ही विद्यालयों में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। दस दिनों तक चली लिखित और मौखिक परीक्षाओं के बाद जब अंतिम पेपर समाप्त हुआ, तो बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और राहत दोनों झलक रही थीं। कई विद्यालयों में बच्चे एक-दूसरे को बधाई देते, खेलते-कूदते और शिक्षकों से मिठाई लेते नजर आए। परीक्षा के तनाव से मुक्त होकर बच्चों ने अपनी खुशी खुलकर जाहिर की। पिछले कई हफ्तों से जिले के सभी प्राथमिक विद्यालयों में परीक्षा की तैयारियाँ जोरों पर थीं। शिक्षक बच्चों को बार-बार अभ्यास करवाते रहे, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में बैठ सकें। बलवाटिका-3 से लेकर पाँचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए यह परीक्षा उनके पूरे वर्ष की मेहनत का मूल्यांकन थी।शिक्षकों ने बताया कि इस बार बच्चों में पढ़ाई को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। कई विद्यालयों में बच्चों ने समूह अध्ययन की पद्धति अपनाई, जिससे उन्हें विषयों को समझने में आसानी हुई। गणित, हिंदी, अंग्रेजी और पर्यावरण अध्ययन जैसे विषयों में बच्चों ने अपनी रचनात्मकता और समझ का परिचय दिया। परीक्षा के दिनों में विद्यालयों का वातावरण गंभीर और अनुशासित रहा। सुबह से ही बच्चे अपने बैग में पेंसिल, रबड़, स्केल लेकर समय से विद्यालय पहुँचते थे। कई बच्चों के चेहरों पर हल्की घबराहट तो थी, लेकिन अधिकांश बच्चे आत्मविश्वास से भरे हुए थे। परीक्षा के दौरान शिक्षकों ने बच्चों को प्रोत्साहित किया कि वे बिना डर के प्रश्नों का उत्तर दें और अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करें। कुछ विद्यालयों में परीक्षा के बाद बच्चों को हल्के-फुल्के खेलों में शामिल किया गया, ताकि उनका तनाव कम हो सके। जैसे ही अंतिम परीक्षा समाप्त हुई, बच्चों ने राहत की साँस ली। विद्यालयों में बच्चों की हँसी-खुशी गूंज उठी। कई विद्यालयों में शिक्षकों ने बच्चों को मिठाई बाँटी और उनकी मेहनत की सराहना की। कुछ बच्चों ने कहा कि अब वे छुट्टियों में खूब खेलेंगे, चित्र बनाएंगे और परिवार के साथ समय बिताएँगे। कक्षा पाँच की छात्रा आयुषी ने बताया, “परीक्षा के दौरान थोड़ा डर लग रहा था, लेकिन अब बहुत अच्छा लग रहा है। अब मैं अपने दोस्तों के साथ खेलूँगी और नई किताबें पढ़ूँगी।” वहीं बालवाटिका-3 के छोटे बच्चों ने अपनी मासूम मुस्कान से सबका दिल जीत लिया। जिला समन्वयक एफ.एल.एन. राजेश वशिष्ठ ने बताया कि प्राथमिक कक्षाओं के बच्चे खेल-खेल में पढ़ाई करते हैं, लेकिन परीक्षा का नाम सुनते ही उनमें भी हल्का तनाव आ जाता है। उन्होंने कहा, “परीक्षा तो परीक्षा होती है, बड़े-बड़े भी इसके नाम से घबरा जाते हैं। ऐसे में जब ये छोटे बच्चे परीक्षा पूरी करते हैं, तो उनके अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है। परीक्षा समाप्ति पर उनकी खुशी देखना वास्तव में सुखद अनुभव है।” उन्होंने आगे कहा कि इस बार जिले के सभी विद्यालयों में परीक्षा प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हुई। शिक्षकों ने बच्चों को न केवल पढ़ाई में बल्कि मानसिक रूप से भी तैयार किया। परीक्षा की सफलता के पीछे शिक्षकों की मेहनत और समर्पण भी झलकता है। उन्होंने बच्चों को पूरे वर्ष निरंतर मार्गदर्शन दिया कई शिक्षकों ने बताया कि बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और अनुशासन की शिक्षा भी दी गई। शिक्षिका कविता ने बताया, “हम बच्चों को यह समझाने की कोशिश करते हैं कि परीक्षा डरने की चीज नहीं, बल्कि अपनी क्षमता को परखने का अवसर है। जब बच्चे इस बात को समझते हैं, तो वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देते हैं।” परीक्षा समाप्ति पर अभिभावकों के चेहरों पर भी संतोष झलक रहा था। कई अभिभावकों ने कहा कि अब वे अपने बच्चों के साथ कुछ समय बिताएँगे और उन्हें नई चीजें सिखाएँगे। रुद्रांश के पिता राजेश  ने कहा, “हमारे बच्चे ने पूरे साल मेहनत की। अब परीक्षा खत्म होने के बाद हम उसे कुछ दिनों के लिए ननिहाल भेजेंगे ताकि वह आराम कर सके।” अभिभावकों ने यह भी कहा कि इस बार विद्यालयों में पढ़ाई का स्तर बेहतर हुआ है और बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा है। परीक्षा समाप्त होते ही बच्चों ने अपनी छुट्टियों की योजनाएँ बनानी शुरू कर दी हैं। कोई अपने दादा-दादी के घर जाने की तैयारी में है, तो कोई गर्मियों की कला कार्यशाला में भाग लेने को उत्साहित है। कक्षा चार के छात्र स्माइल ने बताया, “अब मैं अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलूँगा और गर्मियों में तैराकी सीखूँगा।” वहीं कई बच्चों ने कहा कि वे छुट्टियों में नई किताबें पढ़ेंगे और चित्रकला या संगीत जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। राजेश वशिष्ठ ने बताया कि परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद अगले सत्र की तैयारी शुरू कर दी जाएगी। विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले सत्र में बच्चों की बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को और मजबूत किया जाए। राजेश वशिष्ठ ने कहा कि “हमारा उद्देश्य है कि हर बच्चा पढ़ने, लिखने और गणना करने में दक्ष बने। इसके लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है और विद्यालयों में नई शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।” प्राथमिक स्तर पर परीक्षा का उद्देश्य केवल अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि बच्चों की समझ, रचनात्मकता और आत्मविश्वास को परखना होता है। इस उम्र में बच्चे सीखने की प्रक्रिया में होते हैं, इसलिए परीक्षा उनके लिए एक अनुभव बन जाती है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चों को परीक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण सिखाया जाए, तो वे भविष्य में भी चुनौतियों का सामना सहजता से कर सकते हैं।परीक्षा समाप्ति के बाद विद्यालयों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। शिक्षक अब अगले सत्र की तैयारी में जुट गए हैं। जिले के सभी विद्यालयों में 1 अप्रैल को अभिभावक शिक्षक बैठक ( पीटीएम) आयोजित करवाई जाएगी इसके लिए सभी अध्यापकों द्वारा रचनात्मक गतिविधियों की योजना बनाई जा रही है। विद्यालयों में यह भी देखा गया कि परीक्षा समाप्ति के बाद बच्चों ने अपने शिक्षकों को धन्यवाद दिया और कहा कि वे अगले सत्र में और बेहतर प्रदर्शन करेंगे। जिले में बालवाटिका-3 से पाँचवीं कक्षा तक की परीक्षाओं का सफलतापूर्वक संपन्न होना न केवल शिक्षा व्यवस्था की सफलता का प्रतीक है, बल्कि यह बच्चों की मेहनत, शिक्षकों के समर्पण और अभिभावकों के सहयोग का परिणाम भी है। परीक्षा समाप्ति पर बच्चों की खुशी यह दर्शाती है कि शिक्षा अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह आनंद और आत्मविश्वास का माध्यम बन चुकी है। अब जब बच्चे छुट्टियों की ओर बढ़ रहे हैं, तो उनके चेहरों पर मुस्कान और मन में नए सपनों की चमक है। यह खुशी केवल परीक्षा समाप्ति की नहीं, बल्कि सीखने की यात्रा में एक और पड़ाव पार करने की है।

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